Monday, February 8, 2010

क्यों?

जाना है सभी को दुनिया से,
रह जाएगी ये काया राख बनके|
कम चाहे कितनी दौलत,
कुछ नहीं जायेगा साथ सामान बनके|
क्यों बिताते हैं हम ये जिंदगी?
क्या मिल जाता है,
पहले पैदा होके, फिर मर के?
एक इच्छा पूरी हो तो
दूसरी मन में आ जाती है,
कहाँ पहुँचते हैं हम
इस अंत-हीन रह पर चल के ?
सभी जानते हैं मौत आनी है एक दिन,
तब क्यों भागता है इंसान उससे डर-डर के ?

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