Tuesday, February 9, 2010

अपना सा

बहुत किस्मत से मिलता है कोई,
बहुत अपना सा जो लगे.
साथ हो उसका तो हर पल,
एक सपना सा लगे.
दूर हो तो घडी धीमी चले,
साथ हो तो समय का पता ना चले.
कमी नहीं थी कोई,
उसके आने के पहले,
जाने के बाद उसके,
सब कुछ सूना सूना लगे.

सबसे खूबसूरत इन्सान

ठंडी सर्द रात,
चारों और अँधेरा,
टूटे दांत, काला चेहरा;
बाल भी बिखरे-बिखरे ,
सर्द हवा में भी,
तन पर था तो फटा-पुराना कपडा;
देखो तो फटी आंख ना सुहाए,
पर हुआ तभी कुछ ऐसा,
जिस पर विस्वास न आये,
था वो उस पल,
सबसे खूबसूरत इन्सान,
जब थी उसके दिल में दुआ,
आँखों में चमक,
और आई चेहरे पर निश्छल मुस्कान.

Dead End

I am at dead end,

Let me stay here,

I don't want to go back.

If it is a stone wall,

I will punch it,

Till it break.

If it is a sea,

Either I will drown or cross it,

Just for my own sake.

If i don't do this,

My heart will surely regret.

Monday, February 8, 2010

क्यों?

जाना है सभी को दुनिया से,
रह जाएगी ये काया राख बनके|
कम चाहे कितनी दौलत,
कुछ नहीं जायेगा साथ सामान बनके|
क्यों बिताते हैं हम ये जिंदगी?
क्या मिल जाता है,
पहले पैदा होके, फिर मर के?
एक इच्छा पूरी हो तो
दूसरी मन में आ जाती है,
कहाँ पहुँचते हैं हम
इस अंत-हीन रह पर चल के ?
सभी जानते हैं मौत आनी है एक दिन,
तब क्यों भागता है इंसान उससे डर-डर के ?